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ऊपरवाले पर भरोसा करना कभी मत छोड़ना

    ऊपरवाले पर भरोसा करना कभी मत छोड़ना 

ऊपरवाले पर भरोसा करना कभी मत छोड़ना

      एक आश्रम मे साधु महाराज रहते थे। वे भिक्षा मांगकर अपना जीवन व्यापन व्यतीत करते थे। यह सोच कर आश्रम से शहर कि ओर निकलती हैं, कि वहां कुछ ना कुछ तो मिल ही जाएगा और शहर की भी सैर कर आऊंगा। 


     वह साधु महाराज भगवान का नाम लेते हुए शहर की ओर निकल जाते है। कुछ देर बाद मौसम खराब हो गया और हल्की बारिश होने लगी। वह साधु महाराज बारिश का आनंद लेते हुए चले जा रहे थे। कि आचानक  बीच में उन्हें जलेबी का छोटा सा स्टॉल दिखा।

      साधु महाराज को काफी भूख लग रहा था। वह सोचा "क्यों ना इस हलवाई से कुछ खाने की चीजें मांग लिया जाए।" लेकिन उसकी हिम्मत ही नहीं हुई वहां जाने की।

      तभी हलवाई की नजर उस साधु महाराज पर पड़ती है, जो बारिश में भीग रहे थे। वे मन ही मन सोचने लगते हैं। "लगता हैं साधु महाराज काफी भूखे हैं।" तभी  हलवाई साधु महाराज को अपने पास बुला लेते हैं। और साधु महराज को भरपेट भोजन देते हैं। साधु महाराज भी उन्हें खूब आशीर्वाद देते हैं। तुम सदा खुश रहो, तुम दो-चार और दुकान खोल लो, आगे बढ़ो, और खूब तरक्की करो। ऐसे बहुत से आशीर्वाद देते हैं।

     साधु महाराज वहां से आगे चले जाते हैं अपनी धुन में भगवान का नाम लेते हुए। वर्षा के कारण सड़कों पर भरे हुए पानी को अपने पैरों से सींचते हुए, अपनी धुन में ही चले जा रहे थे। तभी वहां से एक नवविवाहित जोड़ा आ रहे थे। 

     तभी महिला की साड़ी पर पानी की बूंदे चले जाते हैं। जिससे उसके पति साधु महराज से गुस्सा हो जाते हैं। और साधु महाराज को खूब गालियां देने लगते हैं। साधु महाराज को एक जोर से थप्पड़ भी लगा देते हैं। महिला अपने पति से कह रही थी। छोड़ो न अब, गलती से हो गया होगा। यह सांडी धोने के बाद ठीक हो जाएगी। फिर भी उसके पति नहीं माने और साधु महाराज से उलझे रहें। 

     साधु  महाराज भी अपने भगवान से मन हि मन कहते हैं यह आपकी कैसी माया है। कभी भरपेट भोजन देते हो और कुछ देर बाद जोर से चपाटे।

     नवविवाहित जोड़ा अपने घर चले जाते हैं। वे दोनों सीढ़ियों से ऊपर कमरे मे जाने के लिए चढते हैं, कि अचानक उस लड़के का पैर (वर्षा के पानी में गीले होने के कारण) फिसल कर नीचे गिर जाता है। वे लहू-लुहान हो जाते हैं। और  तुरंत ही बेहोश हो जाते हैं।

     सभी लोग वहां इकट्ठे हो जाते हैं। तभी उसकी पत्नी पहले हुई सभी घटना के बारे में बताने लगती हैं। और कहती हैं जरूर उस साधु महाराज ने कोई श्राप दिया होगा, जिससे मेरे पति नीचे गिर गया है। अब वहां इकट्ठे हुए कुछ लड़के गुस्से में उस साधु महाराज को ढूंढने के लिए निकल पड़ता है।

     जैसे हि वे सभी लड़के साधु महाराज को देखते हैं, उसे मारने लगते है। साधु महाराज पूछते हैं। मुझे क्यों मार रहे हो? 'भाई' फिर उन लड़कों ने सारी बात बताते हैं। और कहते है जरूर तुमने मेरे मित्र को श्राप दिया होगा। जिससे वे सीढ़ियों से ऊपर चढ़ते वक्त नीचे गिर गया। 

     तब साधु महाराज उन लड़कों से कहते हैं। देखो इसमें मेरा कोई गलती नहीं है। मुझसे गलती से  उसकी पत्नी की साड़ी पर पानी के छींटे चला गया था। जिससे उसके पति ने मुझे खूब डांटा, एक चपट भी लगाई। मैंने कुछ भी नहीं किया। उन्हें श्राप भी नहीं दिया। उन्होंने यह सब अपने साथी पत्नी के लिए किया। वैसे ही मेरे साथ गलत होते देख मेरे साथी मेरे भगवान चुप कैसे बैठ सकते थे। उन्हें कुछ तो कुछ करना ही था।

     सभी लड़के शांत हो गए और वहां से चले गए। साधु महाराज भी अपने भगवान का नाम लेते हुए उनका गुणगान करते हुए आगे की ओर चला गया। 

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