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दयालु विजय best moral story. Short moral story in hindi.

 दयालु विजय best moral story. Short moral story in hindi. 

     The motivational words मे आप सभी का स्वागत है। आज की हमारी कहानी एक दयालु विजय बच्चे की हैं। best moral story एक बार विजय की दयालुता के बारे मे जरूर पड़े। 

दयालु विजय best moral story. Short moral story in hindi.

     कुछ लोग बचपन से ही बहुत दयालु होते हैं। ऐसी ही हमारा नन्हा सा बालक विजय है। वह बहुत ही दयालु होते हैं। बिच्छू, सन्यासी आदि कोई भी उनके घर से खाली हाथ नहीं लौटते। साधु सन्यासी, भिखारी लगभग रोज इनके घर पर खाना और बिक्छा मांगने के लिए दरवाजे के बाहर आया करते थे।  विजय उन लोगों को जो भी कुछ उसके हाथ में होते थे दे देता था। वह कभी नहीं सोचता था कि इन चीजों की कीमत क्या है?

     उसकी मां परमेश्वरी भी विजय से परेशान हो गई थी। वे हमेशा कहती थी, यदि तुम इसी तरह सभी समान देते रहोगे तो मैं घर ग्रहस्थी कैसे चला पाऊँगी। एक दिन उसके मां ने विजय से परेशान हो कर उसे एक कमरे में बंद कर दिया। और बाहर से ताला लगा दिया। बेचारा विजय क्या करता, वह बहुत ही दुखी हो गया। तभी उसको एक भिखारी की आवाज सुनाई पड़ा। वह भिखारी उसी के दरवाजे पर खड़ा था। दयालु विजय भिखारी को कुछ देना चाहता था। 

     दयालु विजय कमरे की चारों ओर नजर दौड़ाई, उस कमरे मे दो सन्दूके थी। एक पर ताला नहीं लगा था। उन्होंने उस सन्दुख से साल और कंबल निकाला और खिड़की के पास आ गया। भिखारी ठीक खिड़की के नीचे ही खड़ा था। वे पूरा खुला बदन था। वे कपड़े भी नहीं पहने थे। दयालु विजय ने साल और कम्बल उस भिखारी को दे दिया। भिखारी उसे खूब आशीर्वाद देते और दयालु विजय की दयालुता पर गदगद होकर  उसे दुआएं देते हुए वहां से आगे चला गया। 

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