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सोने के अंडे देने वाली मुर्गी की कहानी ( लालच बुरी बला है )

     घनश्याम ने भी बिना सोचे - समझे अपनी पत्नी के बातों मे आ गया। फिर क्या उन्होंने तेज धार वाले चक्कु लाए और मुर्गी का पेट फाड़ दिया। सोने के अंडे देने वाली मुर्गी तुरंत वही पर ही मर गई। घनश्याम और उसकी पत्नी श्यामा हाँथ पर हाँथ बैठ गए। उन्हें पछतावे के साथ बहुत दुःखी होने लगे। इसलिए कहते है लालच बुरी बला है।

सोने के अंडे देने वाली मुर्गी  की कहानी ( लालच बुरी बला है )
सोने के अंडे देने वाली मुर्गी  की कहानी ( लालच बुरी बला है )

     बहुत समय पहले की बात है दो दोस्त हुआ करते थे। एक का नाम राम था, और दूसरे का नाम घनश्याम। दोनों ने बचपन से ही गहरी दोस्ती थी। दरसल घनश्याम एक किसान था। उनका पूरा परिवार जीवन - यापन के लिए एक छोटे से खेत पर निर्भर थे। वह बहुत ही गरीब थे। घनश्याम पैसा इकट्ठा करने के लिए नए-नए तरीके ढूंढा करते थे। उनकी पत्नी श्यामा घर ग्रहणी थी। वह घर पर ही रहती थी।
     इधर राम विदेश चला गया था। वे वही सेटल हो गया था, वही जॉब भी करता था। उनके पास खूब सारे पैसे थे। वे साल के एक महीने अपने गांव में आकर व्यतीत करते थे। इस बार जब राम गांव पहुंचा तब घनश्याम की स्थिति देखकर बड़ा दुखी हुआ। तब राम ने एक उपाय बताया। वे घनश्याम से कहते हैं। क्यों न तुम अंडे का व्यवसाय शुरू कर लो।  तुम कुछ मुर्गियां खरीद लेना और उनसे जो अंडे प्राप्त होंगे उन्हें बेच देना। 
घनश्याम :- लेकिन मेरे पास इतने भी पैसे नहीं है कि मैं मुर्गियां खरीद सकूँ।
     तब राम, घनश्याम को समझाते हुए कहते है। देखो मित्र! मैं आपके सहायता करने के लिए तैयार हूँ। ये कुछ पैसे रख लो, इसे तुम चाहो बढ़ मे मुझे लौटा देना। घनश्याम तैयार हो गया। और बाजार जाकर उन्होंने उन पैसों से कुछ मुर्गियां और उनके लिए चारा ख़रीद लाया। कुछ दिनों तक सब कुछ ठीक चल रहा था। सब कुछ ठीक चल रहा था। एक दिन मुर्गियों ने अंडा देना प्रारंभ कर दिया। उस दिन घनश्याम  अपने खेत गया हुआ था। उसकी पत्नी श्यामा घर पर ही थी। श्याम यह देखकर खुशी से भर गई थी, कि उनमें से एक मुर्गी सोने का अंडा दिया था। 
     किसान घर पहुँच कर अपनी पत्नी को देखकर हैरान हो गया। उनकी पत्नी खूब चमक रही थी। अर्थात गहने पहनी हुई थी। घनश्याम के पूछने पर उसकी पत्नी सभी बात को विस्तार से बताती है। कि कैसे एक मुर्गी ने सोने का अंडा दिया। घनश्याम भी बहुत खुश हो जाते है। अब किसान के बुरे दिन खत्म हो गया था। एक दिन उसकी पत्नी श्यामा सोने लगी - कितने दिन तक एक - एक सोने के अंडे लेते रहेंगे, क्यों ना सभी सोने के अंडे एक साथ प्राप्त किया जाय इससे हमारे सात पुस्तो तक बैठ कर खायेंगे। वे तुरंत इस बारे मे अपने पति से बात करते है। 
     घनश्याम ने भी बिना सोचे - समझे अपनी पत्नी के बातों मे आ गया। फिर क्या उन्होंने तेज धार वाले चक्कु लाए और मुर्गी का पेट फाड़ दिया। सोने के अंडे देने वाली मुर्गी तुरंत वही पर ही मर गई। घनश्याम और उसकी पत्नी श्यामा हाँथ पर हाँथ बैठ गए। उन्हें पछतावे के साथ बहुत दुःखी होने लगे। इसलिए कहते है लालच बुरी बला है।    

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