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Top 3 best moral story बच्चो के लिए नैतिक मूल्यों की कहानियाँ

Top 3 best moral story बच्चो के लिए नैतिक मूल्यों की कहानियाँ 

The motivational words me aap sabhi ka tahedil se svagat hai. Aaj ki hamari kahaniyaa बच्चो के लिए नैतिक मूल्यों की कहानियाँ par adharit hai. Jinme Top 3 best moral story samil hai. Ye easi Top 3 best moral story jinse baccho ko  नैतिक मूल्यों की gyan sikhaya hai. 

Top 3 best moral story बच्चो के लिए नैतिक मूल्यों की कहानियाँ is prakar hai

1. दयालु विजय best moral short story in hindi 2021

2. Murkh batuni cachuaa मूर्ख बातूनी कछुआ huns or kachuaa ki kahani, moral story in hindi 

3.बुढ़िया और गाय की मजेदार कहानी moral story

दयालु विजय best moral short story in hindi 2021

दोस्तों आप अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दीजिए जिससे वह अच्छे काम करने के लिए प्रेरित हो। आज की हमारी कहानी इसी टॉपिक पर आधारित है कि कैसे एक छोटे से बच्चा जिसका नाम विजय है। वह अपनी दयालुता के कारण जाने जाते हैं। दयालु विजय best moral short story in hindi 2021

    दयालु विजय best moral short story in hindi 2021 :- एक गांव में विजय नाम का लड़का रहता था। वह बहुत ही दयालु तथा नेक दिल बच्चा था। उसको सभी प्यार करते थे विजय सभी की मदद करते थे। एक दिन उसकी मां ने उसे केले लेने के लिए दुकान भेजा। जब विजय केला लेकर घर लौट रहे थे, तभी एक छोटी सी बच्ची अपनी मां की गोद में रो रही थी।  वह लड़की भूखी थी विजय के हाथ में केले देखकर अपनी मां से केले के लिए मांग करने लगी। मां ने उसे एक थप्पड़ मार दिया जिससे वह लड़की और भी तेजी से रोने लगी। विजय यह सब देख रहा था उससे रहा नहीं गया तथा उस महिला से पूछ लिया- "आपकी बेटी क्यों रो रही है?" उस महिला ने जवाब दिया "बेटा यह बहुत भूखी हैं मैंने किसी तरह यह थोड़े से आंटा लिया है घर जाकर रोटी बनाकर इसे खिलाऊंगी। मैं बहुत गरीब हूं।" विजय को उन पर बहुत दया आया उसने अपने सारे केले उस लड़की को दे दिया घर वापस लौट कर विजय ने अपनी मां से सारी बातें बता दी। मां बोली "बहुत अच्छा काम किया बेटे भूखे गरीब बच्चे की मदद करके तुम इसी तरह तुम भूखे गरीबों की मदद करते रहना।" 

 Murkh batuni cachuaa मूर्ख बातूनी कछुआ huns or kachuaa ki kahani, moral story in hindi 

एक बहुत ही सुंदर हरे भरे जंगल के बीच छोटा सा तलाब था। इस तालाब में एक बड़बोले कछुआ रहता था। वह बहुत ही चंचल स्वभाव के थे। कछुए की एक बहुत ही गंदी आदत थी कि वह बहुत अधिक बातें किया करते थे। जंगल के जो भी जानवर उस तालाब में पानी पीने के लिए जाते कछुए उनसे खूब बातें किया करते जिससे जानवरों का भी मनोरंजन हो जाता था। 

कछुए और हंसो की दोस्ती 

     एक दिन दो कपल हंस उस तालाब में पानी पीने के लिए आया वे दोनों हंस व्यवहार सिलता व अनुभवी थे कछुआ दोनों हंसो से मीठी-मीठी बातें करना प्रारंभ कर दिया। हंस भी कछुए की मंद चाल से बहुत प्रसन्न थे। अब वे दोनों हंस तालाब किनारे हर शाम को आने लगे कछुआ और हंसो की दोस्ती जमने लगी। देखते-देखते उन तीनो में गहरी दोस्ती हो गई।

 तलाब में अकाल

     एक वर्ष ऐसा भी आया कि तलाब एकदम से सूखने लगे, क्योंकि इस वर्ष बरसात के मौसम में वर्षा भी नहीं हुआ था। कछुआ को यह चिंता खाए जा रहा था, कि मैं कब तक जीवित रह पाऊंगा। अकाल तो बढ़ती जा रही है इधर हंस भी अपने दोस्त के लिए चिंतित होने लगे। वे दोनों इस समस्या से निपटने के लिए कछुए को सांत्वना देते और इससे निपटने के लिए विचार विमर्श करते।  काफी विचार-विमर्श के बाद हंसो ने इस समस्या का हल निकाल ही लिया। 

मूर्ख बातूनी कछुआ 

     हंस कछुआ से कहते हैं। देखो मित्र यहां से 50 कोस दूर एक बहुत बड़ा झील है उसमें तुम अपनी सारी जिंदगी सुख पूर्वक व्यतीत कर सकते हो, तुम्हें कोई भी परेशानी नहीं आएगी। कछुआ यह सब सुनकर रुवासी आवाज में कहते हैं 50 कोस दूर! वहां तक चलते चलते तो कई महीने लग जाएंगे। पता नहीं चलते चलते कब लुढ़क जाऊं? तभी हंस कहते हैं घबराओ नहीं मित्र हम तुम्हें वहां तक ले जाएंगे। 

अंतिम पड़ाव मूर्ख बातूनी कछुआ

     लेकिन कैसे? तभी हंस कछुआ से कहते है। हम दोनों तुम्हें उडाकर ले जाएँगे। तुम बस एक काम करना। अपने मुँह से लकड़ी के बीचो बीच पकड़े रहना। ध्यान रहे जब तक हम वंहा नहीं पहुँच जाते तुम एक भी शब्द अपने मुँह से मत निकलना। अर्थात चुप ही रहना। कछुआ मान जाता है। हँस उसे उडा कर ले जा रहे होते है कि बीच मे एक कस्बे आ जाता है। वंहा के बच्चे, बूढ़े, नवजवान और महिलाए उड़ते हुए कछुआ को देखकर अचम्भित हो जाते है। वे सभी चील्लाने लगते है। वे देखो कछुआ उड़ रहा है। कछुआ उड़ रहा है। इतनी भीड़ को देखकर कछुआ सांत नहीं रह सका। वे हंसो से कहने हि वाले थे कि देखो हमें कितने लोग देख रहे है, वह नीचे गिर गया। नीचे गिरने कि वजह से उसकी हड्डी पसली एक हो गई तथा उसकी मृत्यु हो गई।  

सीख :- बोलना अच्छी बात है लेकिन बेवजह और असमय बोलना घातक साबित हो सकता है। 

बुढ़िया और गाय की मजेदार कहानी moral story


     एक बुढ़िया के पास सफेद रंग की गाय थी। बुढ़िया उसे बहुत ही प्यार करती थी और प्यार से उसे गौरी कर कर बुलाती थी। प्रतिदिन सुबह दूध दुहने के बाद बुढ़िया गाय को चरने के लिए छोड़ देती थी। शाम होते ही गाय वापस घर आ जाती थी। किंतु एक दिन गाय समय से घर नहीं लौटी। चिंता में डूबी बुढ़िया गाय को खोजने निकल पड़ी। दूर एक खेत में गाय खड़ी थी। वह पास गई और बोली "गौरी घर चलो न!" वह चुपचाप खड़ी रही। बुढ़िया के बार बार कहने पर बोली "मैं नहीं चलूंगी; क्या करूंगी घर जाकर?" बुढ़िया की समझ में नहीं आ रही थी कि वह क्या करें।

      उदास मन से बुढ़िया वापस लौटने लगी। रास्ते में उसे एक कुत्ता मिला। वह कुत्ते से बोली, "तुम तो आदमी की बहुत सेवा करते हो। मेरा भी एक काम कर दो न। मेरी गाय घर नहीं आ रही है मुझे दूध नहीं मिलेगा। तुम इसे काट लो कुत्ता बोला मुझे क्या मतलब? मैं नहीं काटूँगा।"

    बुढ़िया आगे बाढी। इतने मे उसे एक लकड़ी का डंडा दिखाई दिया। वह डंडे के पास जाकर बोली,"डंडे - डंडे इस कुत्ते को मारो। यह मेरी गाय को नहीं काटता है।" डंडे ने कहा, "तो मैं क्या करुँ? मैं नहीं मारूंगा।" दुःखी मन से बुढ़िया आगे निकला। रास्ते मे उसे आग दिखा। बुढ़िया ने आग से कहा " तुम इस डंडे को जला दो क्योंकि डंडा कुत्ते को नहीं मार रहा जिससे कुत्ता मेरे गाय को नहीं काट रहा है जिससे मेरी गाय घर नहीं जा रही है और मुझे दूध नहीं मिल रही है " आग ने भी डंडे को जालने से साफ इंकार कर दिया। 

      बुढ़िया फिर दुःखी मन से आगे जाने लगी, रास्ते मे उसे पानी दिखाई दी उन्होंने पानी से भी अपनी सारी बातें बताई लेकिन उन्होंने भी मना कर आग को बुझाने से इंकार कर दिया। बेचारी क्या करती फिर वंहा से निकल गई। आगे उसको बैल मिला। बुढ़िया बैल से बोली " तुम इस पानी को पी जाओ " बैल ने भी पानी पिने से मना कर दिया। 

      रास्ते मे बुढ़िया को रस्सी दिखी। फिर रस्सी से बैल को बाँधने के लिये कहा लेकिन उन्होंने भी साफ इंकार कर दिया । आगे बुढ़िया को चुहा दिखाई पड़ा उससे भी रस्सी को कुतरने के लिये मदद मांगी लेकिन उन्होंने भी साफ इंकार दिया। 

       तब अंत मे बुढ़िया को बिल्ली मौसी  दिखी। उनसे अपनी सारी बातें बताई। बिल्ली ने कहा "मैं चुहे को खाने के लिए तैयार हूँ लेकिन मुझे चुहे को खाने के बदले क्या मिलेगा"? बुढ़िया ने कहा " मैं तुम्हें चुहे को खाने के बदले एक कटोरी दुध दूंगी। बिल्ली मान गई। वे जैसे हि बिल्ली को खाने के लिए गई -

चुहा बोला- " रुको बिल्ली मौसी मैं रस्सी कुतरने के लिए तैयार हूँ"।

रस्सी बोला - "रोको मैं बैल को बाँधने के लिए तैयार हूँ।"

बैल बोली - "रोको मैं पानी पीने के लिए तैयार हूँ।"

पानी बोला - "नहीं नहीं मुझे मत पीना मैं आग बुझाने के लिए तैयार हूँ।"

आग बोला - " रुको मैं लकड़ी जालाने के लिए तैयार हूँ।"

लकड़ी बोला - "रोको मैं कुत्ते को मारने के लिए तैयार हूँ।"

कुत्ता बोला - "रोको मैं गाय को काटने के लिये तैयार हूँ।"

फिर गाय बोली - "रोको मुझे मत काटना मैं घर जाने के लिए तैयार हूँ।"

    फिर क्या बुढ़िया ने बिल्ली मौसी को एक कटोरी दूध पिलाई और धन्यावाद बोली। दोस्तों आपको यह कहानी कैसे लगी हमें कमेंट जरूर करें। 


 


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