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मुर्तिकार एक प्रेरणादाई कहानी। पढिए प्रेरणादाई कहानी अब हिंदी में हस्त लिखित सरल भाषा में

मुर्तिकार एक प्रेरणादाई कहानी। पढिए प्रेरणादाई कहानी अब हिंदी में हस्त लिखित सरल भाषा में

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मुर्तिकार एक प्रेरणादाई कहानी। पढिए प्रेरणादाई कहानी अब हिंदी में हस्त लिखित सरल भाषा में

     एक गांव में बहुत ही प्रसिद्ध मूर्तिकार रहता था। वह बहुत ही सुंदर सुंदर मूर्तियां बनाया करता था। एक दिन वहां के राजा उस मूर्तिकार से प्रभावित होकर एक बहुत बड़ा सुंदर भगवान की मूर्ति बनाने का कार्य सौंपा।  मूर्तिकार भगवान की मूर्ति बनाने के लिए एक अच्छी पत्थर की तलाश में निकल गया। मूर्तिकार को एक बहुत ही बड़ा पत्थर दिखा जिससे मूर्ति बहुत ही सुंदर दिखती। उस पत्थर को अपने घर ले आया। मुर्तिकार भगवान की आकृति में पत्थर को तराशने लगा। कार्य बहुत ही कठिन था। पत्थर उस चोर को सहन नहीं कर पा रहा था। उसने मूर्तिकार से विनती किया, कि अब और चीनी हथौड़ी से मत मारिए। मुझे अत्यधिक कष्ट हो रहा है। आप दूसरे पत्थर का इस्तेमाल कर सकते हैं। फिर क्या मूर्तिकार दूसरे पत्थर की तलाश में निकल गया। 

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     मुर्तिकार को वैसे ही एक दूसरा पत्थर मिल गया। इस बार पत्थर को आकृति देखकर मुर्तिकार भगवान की प्रतिमा बनाई। पत्थर को अत्यधिक चोट लगने पर भी प्रसन्न थे, क्योंकि पत्थर जानता था, यदि अभी इस कष्ट को सहन करूँगा, तो आगे आने वाले समय में रोज मेरी पूजा होगी। मुझ पर फूल बरसेंगी। मुर्तिकार ने पहले वाले पत्थर से सीढ़ी का निर्माण किया। राजा ने मूर्ति को मंदिर में स्थापना की। जब भी भक्तगण मंदिर जाते थे, सीढ़ी पर ही चढ़कर जाते थे। सीढ़ी को बहुत अफसोस हो रहा था। अपने आप को कोसने लगा, "काश उस दिन अगर मैं यह कठिनाई पहले ही झेल लेता तो मैं इस मूर्ति की जगह पर होती। और लोग मेरी पूजा करते।

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     दोस्तों जब भी हमारे साथ अच्छा होने वाला होता है हम बीच में आने वाली कठिनाइयों परेशानियों की वजह से पीछे हट जाते हैं। और बाद में पछतावा करते हैं, कि काश उस दिन ऐसा कर लिया होता, वैसा कर लिया होता तो आज ऐसा ना होता। 

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