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जैसे को तैसा पंचतंत्र की मजेदार कहानी इसे सुन हंसी रोक नहीं पाएंगे hindi kahaniyan

 जैसे को तैसा पंचतंत्र की मजेदार कहानी इसे सुन हंसी रोक नहीं पाएंगे 

दोस्तों आज की कहानी अति आनंद दायक है इसे सुन आप हंसी नहीं रोक पाएंगे अतः कहानी अंत तक अवश्य पढ़ें।

जैसे को तैसा पंचतंत्र की मजेदार कहानी इसे सुन हंसी रोक नहीं पाएंगे hindi kahaniyan

 कहानी इस प्रकार है कि एक राज्य में जीवार्धन नाम के बनिया का लड़का रहता था। उनके पास पूंजी की कमी हो गई थी। अतः वे धन की खोज में परदेस जाने का विचार बनाया। उनके पास धन संपत्ति तो नहीं थी लेकिन उनके पास बहुत पुराना लोहे का तराजू था। जो बहुत ही भारी था। जीवार्धन का लड़का उस तराजू को अपने पड़ोसी के यहां सौंपकर प्रदेश चला जाता है। 

 वे धन संपदा से परिपूर्ण होकर अपनी राज्य वापस आ जाते हैं। जब वह अपना कीमती तराजू अपने पड़ोसी से मानते हैं तो उसके पड़ोसी कहता है क्षमा करें लेकिन आपकी तराजू को तो चूहे ने खा लिया है। बनिए का लड़का समझ चुका था कि या महाजन मेरे तराजू के साथ घपला कर रहा है। लेकिन उनके पास और कोई चारा भी ना था। तभी वे कुछ देर सोचता है, फिर महाजन से कहता है:- मित्र मैं स्नान करने के लिए नदी किनारे जा रहा हूं। आप भी अपने लड़के को मेरे साथ भेज दो, वह भी नहा कर आ जाएगा।

 महाजन बनिए की सज्जनता से अत्यधिक प्रभावित थे। वे तुरंत ही अपने लड़के को बनिए के साथ भेज दिया। बनिया भी चालाक था। उसने महाजन के लड़के को कुछ दूर ले जाकर एक गुफा में बंद कर दिया। और बाहर से पत्थर से ढक दिया जिससे वह लड़का बाहर ना आ सके। 

जब बनिया स्नान का घर वापस लौटे। महाजन बनिया से कहता है :- मित्र मेरा पुत्र भी तो आप ही के साथ स्नान करने के लिए गया था। वह कहां है? दिखाई नहीं दे रहा है। 

 बनिया बोला :- महाजन! क्षमा करें, लेकिन आपके लड़के को तो चील उठा ले गया है।

 महाजन बोले :- यह आप क्या कह रहे हैं? आप कंही मूर्ख तो नहीं हो गए हो। भला एक चील कैसे इतने भारी भरकम इंसान को उठा ले जाएगा। 

 बनिया बोला :- महाजन! जब मेरा भारी-भरकम तराजू को चूहा खा सकता है। तो क्या आप के लड़के को चील उठाकर नहीं ले जा सकता है।

 इस बात से महाजन क्रोधित हो जाते हैं। बनिए और महाजन के मध्य लड़ाई हो जाता है और विवाद को लेकर राजमहल चला जाता है।

 वहां महाजन न्यायाधीश को अपनी दुखद कहानी सुनाता है। "इस बनिया ने मेरा लड़का को चुरा लिया है।"

 न्यायधीश बनिया से कहता है :- बनिया इसक लड़का वापस दे दो।

 बनिया बोला :- लेकिन महाराज, उसे तू चील उड़ा के ले गया है। तो कहां से लाकर दूं?

 न्यायाधीश कहता हैं :- ये आप क्या कह रहे हो? क्या कभी चील लड़के को उठाकर ले जा सकता हैं।

 बनिया कहता है :- बच्चे को चील उठाकर ले जाए, यह संभव नहीं हो सकता तो फिर भारी भरकम तराजू को चूहा कैसे खा सकता है। बनिया अपना सारा वृतांत कथा न्याधीश को बता देता है।

 इसे कहते हैं जैसे को तैसा यह कहानी आपको कैसा लगा हमें अवश्य बताएं।

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