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Panchtantra ki kahaniyan. Top 5 Panchtantra ki kahaniyan in hindi. Hindi kahaniyan. Kahaniyan

Panchtantra ki kahaniyan. Top 5 Panchtantra ki kahaniyan in hindi. Hindi kahaniyan. Kahaniyan. 

दोस्तों आज मैं Panchtantra ki kahaniyan. Top 5 Panchtantra ki kahaniyan in hindi. Hindi kahaniyan. Kahaniya. को लेकर आया हूँ।Panchtantra ki kahaniyan बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक बहुत पसंद करते है। लेकिन बात करें आज कल के बच्चों कि, तो बच्चे TV के माध्यम से इन kahaniyan को देखकर खूब लुप्त उठाते है। यदि आप युवा है तो इन kahaniyan को एक बार बच्चों को सुनाकर अवश्य देखना। बच्चों को यदि आप अपनी बातों मे बांधकर रखना चाहते हो तो यह  Panchtantra ki kahaniyan ही एक मात्रा ही उत्तम विधा है। जिनके माध्यम से बच्चे प्रसन्न तो होंगे ही सांथ ही सांथ उनकी ज्ञान मे भी वृद्दि होगी। 

आज मैं Top 5 Panchtantra ki kahaniyan in hindi. में लेकर आया हूँ।

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Panchtantra ki kahaniyan :-

1. जैसे को तैसा Panchtantra ki kahaniyan। 

2. शरारती मूर्ख बंदर और बढ़ई की कहानी

3. ईमानदार लकड़हारा की कहानी

4. चालाक गधा और शेर की कहानी 

5. भूखे शेर की छोटी सी कहानी

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जैसे को तैसा Panchtantra ki kahaniyan :-

 कहानी इस प्रकार है कि एक राज्य में जीवार्धन नाम के बनिया का लड़का रहता था। उनके पास पूंजी की कमी हो गई थी। अतः वे धन की खोज में परदेस जाने का विचार बनाया। उनके पास धन संपत्ति तो नहीं थी लेकिन उनके पास बहुत पुराना लोहे का तराजू था। जो बहुत ही भारी था। जीवार्धन का लड़का उस तराजू को अपने पड़ोसी के यहां सौंपकर प्रदेश चला जाता है। 

 वे धन संपदा से परिपूर्ण होकर अपनी राज्य वापस आ जाते हैं। जब वह अपना कीमती तराजू अपने पड़ोसी से मानते हैं तो उसके पड़ोसी कहता है क्षमा करें लेकिन आपकी तराजू को तो चूहे ने खा लिया है। बनिए का लड़का समझ चुका था कि या महाजन मेरे तराजू के साथ घपला कर रहा है। लेकिन उनके पास और कोई चारा भी ना था। तभी वे कुछ देर सोचता है, फिर महाजन से कहता है:- मित्र मैं स्नान करने के लिए नदी किनारे जा रहा हूं। आप भी अपने लड़के को मेरे साथ भेज दो, वह भी नहा कर आ जाएगा।

 महाजन बनिए की सज्जनता से अत्यधिक प्रभावित थे। वे तुरंत ही अपने लड़के को बनिए के साथ भेज दिया। बनिया भी चालाक था। उसने महाजन के लड़के को कुछ दूर ले जाकर एक गुफा में बंद कर दिया। और बाहर से पत्थर से ढक दिया जिससे वह लड़का बाहर ना आ सके। 

जब बनिया स्नान का घर वापस लौटे। महाजन बनिया से कहता है :- मित्र मेरा पुत्र भी तो आप ही के साथ स्नान करने के लिए गया था। वह कहां है? दिखाई नहीं दे रहा है। 

 बनिया बोला :- महाजन! क्षमा करें, लेकिन आपके लड़के को तो चील उठा ले गया है।

 महाजन बोले :- यह आप क्या कह रहे हैं? आप कंही मूर्ख तो नहीं हो गए हो। भला एक चील कैसे इतने भारी भरकम इंसान को उठा ले जाएगा। 

 बनिया बोला :- महाजन! जब मेरा भारी-भरकम तराजू को चूहा खा सकता है। तो क्या आप के लड़के को चील उठाकर नहीं ले जा सकता है।

 इस बात से महाजन क्रोधित हो जाते हैं। बनिए और महाजन के मध्य लड़ाई हो जाता है और विवाद को लेकर राजमहल चला जाता है।

 वहां महाजन न्यायाधीश को अपनी दुखद कहानी सुनाता है। "इस बनिया ने मेरा लड़का को चुरा लिया है।"

 न्यायधीश बनिया से कहता है :- बनिया इसक लड़का वापस दे दो।

 बनिया बोला :- लेकिन महाराज, उसे तू चील उड़ा के ले गया है। तो कहां से लाकर दूं?

 न्यायाधीश कहता हैं :- ये आप क्या कह रहे हो? क्या कभी चील लड़के को उठाकर ले जा सकता हैं।

 बनिया कहता है :- बच्चे को चील उठाकर ले जाए, यह संभव नहीं हो सकता तो फिर भारी भरकम तराजू को चूहा कैसे खा सकता है। बनिया अपना सारा वृतांत कथा न्याधीश को बता देता है।

 इसे कहते हैं जैसे को तैसा यह कहानी आपको कैसा लगा हमें अवश्य बताएं।

शरारती मूर्ख बंदर और बढ़ई की कहानी

दोस्तों अच्छे से जांचे परखे या बिना सोचे समझे कुछ भी खाने को नहीं करना चाहिए वरना उसका अंजाम कितना घातक होता है इस कहानी से समझे :- 

    एक जंगल के पास ही कुछ बढ़ई लकड़ी को चीरने का काम कर रहे थे।  कुछ बंदर भोजन की तलाश में एक झुंड में वहीं पर पहुंच गया। तथा वहीं के आसपास के पेड़ों में उछल कूद मचाने लगा। इन सभी बंदरों में एक बंदर बहुत ही ज्यादा शरारती था। कुछ देर बाद काफी धूप निकल आया। बढ़ई के दोपहर भोजन का समय हो गया था।  सभी भोजन करने के लिए चला गया।  लेकिन एक बढ़ई, लड़की को अधूरा ही चीरा था। कहीं दोनों फाली चिपक ना जाए, इसलिए उन्होंने बीच में एक कील को छोड़ दिया। और वह भी भोजन करने के लिए चला गया। 

     बंदरों के झुंड से शरारती बंदर निकलकर उसी स्थान पर पहुंच गया जहां बढ़ई का कार्य चल रहा था। उस स्थान पर दूर-दूर तक कोई मौजूद नहीं था। शरारती बंदर वहां उछल कूद करने लगा। वहां मौजूद बढ़ई  के सामानो के सांथ खेलने लगा। लेकिन अचानक उसे बढ़ई द्वारा छोड़े हुए अधूरे कार्य वाला लट्ठा दिखा जिसके बीच में कील लगा हुआ था। शरारती बंदर वहां पहुंचकर उस कील को निकालने की कोशिश कर रहा था। शरारती बंदर अत्यधिक जोर से उस कील को निकाल पाने में सफल हो गया। लेकिन उसका पूछ लकड़ी के दोनों फाली के बीच में चिपक गया।

     शरारती बंदर बिना सोचे समझे उस कार्य को करता है, जिसे नहीं करना चाहिए था। फिर क्या, बंदर करहाते रहे और जोर-जोर से चिल्लाने लगे। लेकिन दूर दूर तक वहां कोई मौजूद नहीं था, अतः कुछ देर बाद ही उसने वहीं दम तोड़ दिया।

     दोस्तों हर कार्य सोच समझकर ही करना चाहिए बिना सोचे समझे कार्य करने से क्या हाल होता है आप उक्त कहानी से समझ गए ही होंगे

एक सैनिक की रुला देने वाली कहानी

ईमानदार लकड़हारा की कहानी

एक गांव में एक ईमानदार लकड़हारा रहता था उनका और उनके परिवार का जीवन लकड़ी की धंधे से चलता था।  लकड़हारा बहुत ही सीधा साधा और ईमानदार व्यक्ति था। लकड़हारा की ईमानदारी का परिचय उनके जीवन के एक छोटी सी घटना से पता चलता है। तो चलने देते हैं :-

     दरअसल ईमानदार लकड़हारा प्रतिदिन लकड़ी काटने के लिए जंगल जाया करता था। एक दिन लकड़हारा नदी किनारे वाले पेड़ पर चढ़कर टहनियां काट रहे थे। अचानक उनके हाथ से कुल्हाड़ी छूट जाती हैं और नदी में गिर जाता है। ईमानदार लकड़हारा कुल्हाड़ी को ढूंढने की बहुत कोशिश करता है, लेकिन वह कुल्हाड़ी ढूंढने में असफल हो जाता है। लकड़हारा दुखी होकर वहीं पर बैठकर दुःखी मन से भगवान से प्रार्थना करता है। हे भगवान! कृपया मेरी कुल्हाड़ी खो गई है उसे ढूंढने में मेरी मदद कीजिए। नदी देवता उनकी प्रार्थना को सुनकर प्रकट हुआ। नदी देव को ईमानदार लकड़हारा सारी घटना बता दी। नदी देव कुछ क्षण के लिए गायब हो गया। और जब प्रकट हुए तो उनके हाथ में सुनहरी कुल्हाड़ी थे। लकड़हारे से कहा :-  क्या यह सुनहरी कुल्हाड़ी आपकी हैं?

लकड़हारा :- नहीं नदी देव, लगता है यह किसी अमीर व्यक्ति की होगी। आप उसे लौटा दीजिएगा। नदी देव कुछ क्षण के लिए गायब हो गया। और जब प्रकट हुए तो उनके हाथ में चांदी की कुल्हाड़ी थी। फिर से नदी देव बोले :-  हे वत्स तो फिर क्या यह कुल्हाड़ी आपकी है ? 

लकड़हारा :-  यह कुल्हाड़ी भी मेरी नहीं है नदी देव, लेकिन जिनकी भी हो आप उसे लौटा दीजियेगा जरूर। इस बार नदी देव विलम्ब से प्रकट हुआ। उनके हाथ में लोहे का कुल्हाड़ी था। उसे देख ईमानदार लकड़हारा बोला :-  ऐसा प्रतीत होता है कि यह कुल्हाड़ी मेरी ही कुल्हाड़ी जैसी दिख रहा है, यह कुल्हाड़ी मुझे दे दीजिए। नदी देव  लकड़हारा की ईमानदारी से बहुत प्रसन्न हुआ। नदी देव ने लकड़हारे को उनकी कुल्हाड़ी के साथ साथ बाकी के दोनों  कुल्हाड़ी को भी उपहार स्वरूप दे दिया।  

शिक्षा :- चाहता तो लकड़हारा सुनहरी कुल्हाड़ी  या फिर चांदी की कुल्हाड़ी लालच बस ले सकता था। किंतु उन्होंने ऐसा नहीं किया उन्होंने उस समय उस स्थान पर अपनी ईमानदारी दिखाई, उसका फल उसे अंत में जरूर मिला। आप भी ईमानदार बने। और हमारे साथ बने रहे The Motivational Words में। 

मुर्तिकार एक प्रेरणादायी कहानी

चालाक गधा और शेर की कहानी

 एक जंगल में शेर रहता था वह प्रतिदिन नदी किनारे पानी पीने के लिए जाया करता था। एक दिन जब शेर नदी के एक किनारे पानी पी रहा होता है। उसी समय नदी के दूसरे किनारे एक गधा पानी पी रहा था। गधे को देख शेर कहते है। "मैंने सुना है कि एक घोड़ा बहुत ही सुंदर गाना गाते हैं मैं उनका गाना सुनना चाहता हूं।" गधा शेर की चाल नहीं समझ पाया। गधा बोला :- महाराज घोड़े की गाना बाद में सुनना, पहले मेरा यह गाना तो सुनिए। गधा जैसे ही आंख बंद करके रेंकने लगा, शेर चुपके से नदी पार कर गधे को पकड़ लिया। गधा भी चलाक था। चलाक गधा वहां पर अपनी चलाकी दिखाई। और फिर शेर से बोला  -: महाराज मैंने सुना है कि शेर बहुत ही बलवान और जंगल की सबसे शक्तिशाली प्राणी है। मैं जानता हूं, कि आप मुझे अपना भोजन बनाने वाले है।  लेकिन शेर भोजन करने से पहले भोजन मंत्र अवश्य करता है। फिर क्या शेर अपनी प्रशंसा सुनकर गर्व से भर उठता है और जैसे ही भोजन मंत्र करने के लिए अपनी आंखें बंद करता है। गधे को वहां से नौ दो ग्यारह होने के लिए सही समय मिल जाता है। तथा वहां से फरार हो जाता है। शेर को अपनी मूर्खता पर अफसोस होने लगता है।

भूखे शेर की छोटी सी कहानी :-

    भीषण गर्मी के दिनों में एक भूखा शेर भोजन की तलाश में जंगल में भटक रहा था। तभी उसे एक खरगोश दिखा। सेर सोचने लगा "इतनी छोटी प्राणी से मेरा पेट नहीं भर पाएगा" अतः वे वहां से आगे चला गया। रास्ते में उसे एक हिरण दिखा। हिरण को देखकर सेर उसका शिकार करने के लिए पीछा किया। किंतु वह खाने की तलाश में बहुत चला था। वे थक गए थे। जिसके कारण हिरण को नहीं पकड़ पाए। अब उसे कुछ सूझ नहीं रहा था, कि क्या किया जाए? अतः खरगोश को खाने के लिए वापस उसी स्थान पर गए। लेकिन वहां खरगोश मौजूद नहीं था। बेचारा शेर क्या करता बहुत दिनों तक ऐसे ही बुखा रहा।

     शिक्षा अभी फिलहाल जो मौजूद हो उसी में खुश हो जाओ वरना बाद में पछताना पड़ेगा। 

निष्कर्ष :-

आशा करता हूँ यह Top 5 Panchtantra ki kahaniyan in हिंदी का kahaniyan संग्रह आपको अच्छा लगा होगा। 

इसे भी अवश्य पढ़ें :-

1. कामना पूर्ति दो शिष्य की कहानी 


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1 टिप्पणियाँ

new upcoming movies 2020 ने कहा…
I love Your Story Thank You So Much For Sharing This Nice Story