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Top 3 bhagwan ki kahani, bhagwan ki kahaniyan in hindi,सफलता पाने के लिए 3 अच्छी कहानियां।

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दोस्तों आज मैं लेकर आ गया हूँ Top 3 bhagwan ki kahani, bhagwan ki kahaniyan in hindi,सफलता पाने के लिए 3 अच्छी कहानियां। यह bhagwan ki kahani हमें बहुत बड़ी शिक्षा देने वाली हैं।
  हर एक  bhagwan ki kahani मे बहुत बड़ी बात छुपी हुई है। अतः आपसे निवेदन है कि, इसे बारीकी से और ध्यान से पड़े। क्योंकि यहाँँ आपके लिए हर एक वर्ड कीमती होनी वाली है। 

Top 3 bhagwan ki kahani, bhagwan ki kahaniyan in hindi,सफलता पाने के लिए 3 अच्छी कहानियां :- 

1. Hindi kahani :- कल की चिंता में खोए हुए इस कहानी को अवश्य सुने. Best Motivational story
2. ऊपरवाले पर भरोसा करना कभी मत छोड़ना
3. खुश रहने का सिक्रेट क्या है? Happines sicret motivation short for kids national youth's story telling 2021


1. Hindi kahani कल की चिंता में खोए हुए इस कहानी को अवश्य सुने Best Motivational story. 

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Hindi kahani :- कल की चिंता में खोए हुए इस कहानी को अवश्य सुने. Best Motivational story
Best Motivational stories
 
  बात उन दिनों की है जब भगवान शिव की कैलाश पर्वत पर सभा लगना था। सभी देवता गण उस सभा में सम्मिलित होने थे। तभी भगवान विष्णु अपने वाहन गरुड़ जी के साथ कैलाश पर्वत पहुंचा। 

   गरुड बहुत ज्यादा तेज उड़ते थे। उसे रेस में कोई भी नहीं हरा सकता था। वे मिनटों में हजारों कोस दूर उड़कर पहुंच सकते थे। विष्णु भगवान महल के अंदर चला गया और गरुड़ जी कैलाश पर्वत की खूबसूरती को निहार रहा था। 

   प्राकृतिक दृश्यों को देख रहे थे। तभी उनकी दृष्टि छोटी सी सुंदर रंग बिरंगी चिड़िया पर पड़ता है। गरुड उन्हें निहारता ही रहता है और सोचता है :- भगवान इसे कितना सुंदर बनाया है। ऐसा लगता हैं, बस इसे देखता ही रहूं। तभी वहां यमराज जी भी आ गया। 

 गरूड़ यमराज जी को प्रणाम करता है। यमराज जी गरुड़ को आशीर्वाद देता है। यमराज जी पहले तो उस चिड़िया को एकदम आश्चर्य से देखते हैं फिर महल के अंदर की ओर चला जाता है। देव सभा में।

   गरुड़ जी सोचने लगे कि "लगता है इस चिड़िया का अंतिम समय निकट आ गया है। जब यमराज जी देव सभा से निकलेगा तब इस चिड़िया को भी अपने साथ ले जाएंगे।"

   यह सोच गरुड़ जी उस सुंदर चिड़िया को अपने पंजों में पकड़ लिया और वहां से बहुत दूर लगभग हजारों कोस दूर एक सुनसान जंगल में एक पत्थर पर छोड़ दिया और अपने आप से कहने लगा। "अब शायद यह चिड़िया यहां सुरक्षित रहेगा, इसे यमराज जी भी अभी नहीं ले जा सकते। 

   भगवान भरोसे छोड़ गरुड़ कुछ समय में ही कैलाश पर्वत पर फिर पहुंच गया क्योंकि गरुड़ जी बहुत ही तेज रफ्तार से एक स्थान से दूसरे स्थान पहुंच जाते थे। उनका मुकाबला कोई नहीं कर सकता था। 

   जब गरुड़ जी कैलाश पर्वत पर पहुंचा फिर से कैलाश पर्वत की प्राकृतिक दृश्यों को निहारता रहा। तभी देव सभा समाप्त हो गया। यमराज जी बहार आए। गरुड जी यमराज जी से पूछ लिया :- यमराज जी आप जाने से पहले एक चिड़िया को इतने आश्चर्य से क्यों देख रहे थे।

 यमराज जी कहते हैं :- गरुड़ उस चिड़िया का अंतिम समय निकट आ गया था। लेकिन उसकी मृत्यु जहां कैलाश पर्वत पर नहीं होती। यहां से हजारों कोष दूर एक सुनसान जंगल में, जब यह चिड़िया एक पत्थर पर बैठी होगी तब एक सांप के द्वारा उसका भोजन बनेगी। 

 मैं यह सोच कर आश्चर्यचकित था, कि वह सुंदर चिड़िया अभी कैलाश पर्वत में है तो इतने कम समय में हजारों कोस दूर सुनसान जंगल पर कैसे पहुंच सकते हैं। लेकिन अभी तो वह सुंदर चिड़िया दिखाई नहीं दे रहे हैं। अर्थात उसकी मृत्यु निश्चित हो गई होगी। 

  तब गुरुजी सोचने लगता है। यह मैंने क्या कर दिया मैंने उस चिड़िया को उस सुनसान जंगल में उस पत्थर पर छोड़ आया। अभी तक तो वह चिड़िया सांप का भोजन बन गई होगी और उसकी मृत्यु भी हो गई होगी। 

   दोस्तों मृत्यु को कोई नहीं टाल सकता। हमें अपने आने वाले अगला पल ही ज्ञात नहीं होता, फिर भी हम कल की चिंता में खोए हुए होते हैं। अतः आप हर एक पल को खुल कर जिओ उसका आनंद लिया करें।

   जब हमारी जाने का समय होगा तो भगवान उस समय ले जाएंगे। बेवजह क्यों सोचते रहते हैं अपने जीवन के बारे में।

2. ऊपरवाले पर भरोसा करना कभी मत छोड़ना


    एक आश्रम मे साधु महाराज रहते थे। वे भिक्षा मांगकर अपना जीवन व्यापन व्यतीत करते थे। यह सोच कर आश्रम से शहर कि ओर निकलती हैं, कि वहां कुछ ना कुछ तो मिल ही जाएगा और शहर की भी सैर कर आऊंगा। 

     वह साधु महाराज भगवान का नाम लेते हुए शहर की ओर निकल जाते है। कुछ देर बाद मौसम खराब हो गया और हल्की बारिश होने लगी। वह साधु महाराज बारिश का आनंद लेते हुए चले जा रहे थे। कि आचानक बीच में उन्हें जलेबी का छोटा सा स्टॉल दिखा।

      साधु महाराज को काफी भूख लग रहा था। वह सोचा "क्यों ना इस हलवाई से कुछ खाने की चीजें मांग लिया जाए।" लेकिन उसकी हिम्मत ही नहीं हुई वहां जाने की।

      तभी हलवाई की नजर उस साधु महाराज पर पड़ती है, जो बारिश में भीग रहे थे। वे मन ही मन सोचने लगते हैं। "लगता हैं साधु महाराज काफी भूखे हैं।" तभी हलवाई साधु महाराज को अपने पास बुला लेते हैं। और साधु महराज को भरपेट भोजन देते हैं। साधु महाराज भी उन्हें खूब आशीर्वाद देते हैं। तुम सदा खुश रहो, तुम दो-चार और दुकान खोल लो, आगे बढ़ो, और खूब तरक्की करो। ऐसे बहुत से आशीर्वाद देते हैं।

     साधु महाराज वहां से आगे चले जाते हैं अपनी धुन में भगवान का नाम लेते हुए। वर्षा के कारण सड़कों पर भरे हुए पानी को अपने पैरों से सींचते हुए, अपनी धुन में ही चले जा रहे थे। तभी वहां से एक नवविवाहित जोड़ा आ रहे थे। 

     तभी महिला की साड़ी पर पानी की बूंदे चले जाते हैं। जिससे उसके पति साधु महराज से गुस्सा हो जाते हैं। और साधु महाराज को खूब गालियां देने लगते हैं। साधु महाराज को एक जोर से थप्पड़ भी लगा देते हैं। महिला अपने पति से कह रही थी। छोड़ो न अब, गलती से हो गया होगा। यह सांडी धोने के बाद ठीक हो जाएगी। फिर भी उसके पति नहीं माने और साधु महाराज से उलझे रहें। 

     साधु महाराज भी अपने भगवान से मन हि मन कहते हैं यह आपकी कैसी माया है। कभी भरपेट भोजन देते हो और कुछ देर बाद जोर से चपाटे।

     नवविवाहित जोड़ा अपने घर चले जाते हैं। वे दोनों सीढ़ियों से ऊपर कमरे मे जाने के लिए चढते हैं, कि अचानक उस लड़के का पैर (वर्षा के पानी में गीले होने के कारण) फिसल कर नीचे गिर जाता है। वे लहू-लुहान हो जाते हैं। और तुरंत ही बेहोश हो जाते हैं।

     सभी लोग वहां इकट्ठे हो जाते हैं। तभी उसकी पत्नी पहले हुई सभी घटना के बारे में बताने लगती हैं। और कहती हैं जरूर उस साधु महाराज ने कोई श्राप दिया होगा, जिससे मेरे पति नीचे गिर गया है। अब वहां इकट्ठे हुए कुछ लड़के गुस्से में उस साधु महाराज को ढूंढने के लिए निकल पड़ता है।

     जैसे हि वे सभी लड़के साधु महाराज को देखते हैं, उसे मारने लगते है। साधु महाराज पूछते हैं। मुझे क्यों मार रहे हो? 'भाई' फिर उन लड़कों ने सारी बात बताते हैं। और कहते है जरूर तुमने मेरे मित्र को श्राप दिया होगा। जिससे वे सीढ़ियों से ऊपर चढ़ते वक्त नीचे गिर गया। 

     तब साधु महाराज उन लड़कों से कहते हैं। देखो इसमें मेरा कोई गलती नहीं है। मुझसे गलती से उसकी पत्नी की साड़ी पर पानी के छींटे चला गया था। जिससे उसके पति ने मुझे खूब डांटा, एक चपट भी लगाई। मैंने कुछ भी नहीं किया। उन्हें श्राप भी नहीं दिया। उन्होंने यह सब अपने साथी पत्नी के लिए किया। वैसे ही मेरे साथ गलत होते देख मेरे साथी मेरे भगवान चुप कैसे बैठ सकते थे। उन्हें कुछ तो कुछ करना ही था।

     सभी लड़के शांत हो गए और वहां से चले गए। साधु महाराज भी अपने भगवान का नाम लेते हुए उनका गुणगान करते हुए आगे की ओर चला गया।

3.   खुश कैसे रहा जाए?

खुश रहने का सिक्रेट क्या है?

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     एक बच्चा था वह बहुत ही होनहार था। एक दिन वे अपने पिताजी से प्रश्न पूछते हैं पिताजी खुश कैसे रहा जाता हैं? अर्थात खुश रहने का राज क्या है? पिताजी हैरानी से कहते हैं इतनी छोटी सी उम्र में यह सवाल, मैं शायद ही इसका सही जवाब दे पाऊंगा। लेकिन एक ऐसा व्यक्ति हैं जो तुम्हें इस प्रश्न का उत्तर दे सकता है।

वह कौन है? पिताजी मुझे जल्दी बताओ। वह कहां मिलेगा?

     पिता जी कहते हैं। वंहा दूर एक पहाड़ी है जँहा बहुत ही खूबसूरत जगह है। ऊपर एक महल मिलेगा, जिसमें एक महान बुद्धिमान पुरुष रहते हैं। वे तुम्हें सभी सवालों का जवाब दे सकते हैं। पिता जी मैं वहां जाना चाहता हूं। वह बच्चा अगले ही दिन अपनी सभी समान पकड़कर, टिफिन पैक कर वहां जाने के लिए निकल पड़ा।

     दो-तीन दिनों की कड़ी परिश्रम के बाद वे लड़का उस पहाड़ पर पहुंच गया। लड़का वहां का दृश्य देखकर खयालों में ही खो गया। वह जगह बहुत ही खूबसूरत थी। वह लड़का सोचता हैं, "पहले मैं जिस काम के लिए आया हूं उसे पूरा कर लेता हूं।" वहीं पास के बगीचे में एक व्यक्ति काम कर रहा होता है। लड़का उससे बुद्धिमान व्यक्ति के बारे में पूछता है। वह व्यक्ति लड़के को बताते हैं कि उधर एक महल है तुम्हें वहीं पर बुद्धिमान व्यक्ति मिलेगा। वह लड़का अपनी मंजिल को ढूंढते हुए आगे की ओर बढ़ता जाता है।  

     आखिरकार वह लड़का महल तक पहुँच हि जाता है। वहां पहले से कई सारे लोग मौजूद होते हैं। जो बाबा जी से सवाल कर रहे होते हैं। वे लड़का अंदर का दृश्य देख मनमोहित हो जाते हैं। फूलों की सजावट, तरह-तरह के पकवान और उस महल की मधुर सुगंध मन को विचलित कर उठता है। कड़ी मशक्कत के बाद (लगभग 3 से 4 घंटे बाद) उस लड़के का नंबर आया। लड़के बाबा जी से अपना सवाल प्रस्तुत करते हैं।

     बाबा जी आप को मेरा सादर प्रणाम, मेरा सवाल यह है कि, व्यक्ति की खुश रहने का राज क्या है? वह बाबाजी बड़ी प्रसन्नता से कहते हैं। बेटा इतनी छोटी सी उम्र में इतना बड़ा सवाल तुम बहुत प्रभावशाली लग रहे हो। इस सवाल का जवाब मैं तुम्हें तभी दूंगा जब तुम मेरे द्वारा दिए कार्य को पूरा कर लोगे। बाबाजी वह कार्य क्या है? मुझे जल्दी बताओ। बेटा धैर्य रखो। दरअसल तुम्हें इस महल को घूम कर अच्छी तरह से देखना होगा। यहां की खूबसूरत बगाने, विशाल पुस्तकालय, पेंटिंग और भी बहुत कुछ। लेकिन तुम एक चम्मच को पकड़े रहोगे जिसमें दो बूंद तेल होगा। लेकिन याद रहे पूरे महल घूमने तक इस चम्मच से एक भी बूंद तेल नीचे नहीं गिरना चाहिए।

     लड़का महल की भ्रमण के लिए निकल पड़ा। महल में बहुत ही घुमावदार जगह थी। उनका पूरा ध्यान उस चम्मच पर ही था। कि कहीं एक भी बूंद तेल नीचे ना गिर जाए। पूरे महल को घूमने के बाद फिर से वह लड़का बाबा जी के पास आ जाता है। बाबा जी मैंने आपका पूरा महल घूम लिया है। अब तो बताइए खुश रहने का राज क्या है? बाबा जी कहते हैं। तुमने वो बगीचे देखा कितनी खूबसूरत हैं। और वे फुल पूरे वातावरण को सुगंधित कर दिया है। इसे मैं 10 सालो के कड़ी परिश्रम के पश्चात बना पाया हूँ।

     तुमने वह भव्य पेंटिंग देखी जो आंखों को चकाचौंध कर दें। और वो विशाल पुस्तकालय देखा जिनमें बहुत सारे अनमोल किताबें हैं। यदि कोई उन किताबों को पढ़ लो तो इस संसार में ऐसा कोई भी सवाल नहीं है जिसका जवाब उसे पता ना हो। लड़का बोला क्षमा करें बाबा जी मैंने महल को ठीक से देख नहीं पाया मेरा पूरा ध्यान इस चम्मच पर था कि कहीं तेल की बूंद नीचे गिर ना जाए। बाबा जी कहते हैं बेटा तुम फिर से एक बार महल को घूम आओ। इस बार महल को तुम अच्छी तरह से देखना। 

     लड़का एक बार फिर से  महल को अच्छी तरह से घूम कर वापस आ गया। बाबा जी द्वारा पूछे जाने पर सभी सवालों का जवाब देने लगा। फिर बाबा जी पूछते हैं वह चम्मच कहां गया जिसमें तेल की बूंदे थी। लड़का कहते है - बाबा जी महल इतनी खूबसूरत था। मैं तो बिल्कुल ही आकर्षित हो गया था। मुझे पता ही नहीं चला कि कब मुझसे चम्मच से वे दो बूंद तेल नीचे गिर गया।  देखो बेटा जब मैंने तुम्हें पहले महल देखने के लिए भेजा। तब तुम्हारा पूरा ध्यान उस चम्मच पर था तुम महल की खूबसूरती को देख नहीं पाए। और जब दूसरी बार भेजा तो तुमने महल की  खूबसूरती को निखारा, देखा, परखा और आनंद लिया। लेकिन तुम उस चम्मच को भूल गए। अपनी बेस को भूल गए।

     खुश रहने का राज यह है कि तुम जो भी करो कितनी भी खूबसूरत चीजें दिखो अपनी बेस को कभी ना भूलना।  जो व्यक्ति अपनी जड़ के साथ साथ, संस्कारों के साथ साथ आगे बढ़ते हैं, वह कभी दुखी नहीं होते और हमेशा खुश रहते हैं। वे सफलता की ऊंचाइयों को छूते हैं। उस लड़के को अपनी सवाल का जवाब मिल गया। और वे खुशी-खुशी अपने घर चला गया।

     दोस्तों हमें भी उस बाबाजी के सिखाएं हुए रास्तों पर चलना है। सच में खुश रहने का राज यही है कि हम अपने संस्कारों को (अपनी जड़ को ) बिना भुलाए आगे बढ़े, आधुनिक जीवन का आनंद लें। सफलता आपकी कदमों को चूमेगी। यह कहानी आपको कैसी लगी हो हमें कमेंट जरूर करें। 

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